श्री गणेश जी की पूजा विधि और संपूर्ण आरती
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का ध्यान और पूजन किया जाता है। श्री गणेश जी विघ्नहर्ता हैं, जो अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं। इस लेख में हम भगवान गणेश की सरल और शुद्ध पूजा विधि तथा उनकी आरती के बारे में विस्तार से जानेंगे।
श्री गणेश जी की पूजा विधि
गणेश जी की पूजा करते समय कुछ विशेष बातों और सही क्रम का ध्यान रखना आवश्यक है। नीचे दी गई विधि का पालन कर आप आसानी से भगवान गजानन को प्रसन्न कर सकते हैं:
- गणेश जी का ध्यान: सर्वप्रथम अपने मन को शांत करें और भगवान गणेश का सच्चे मन से ध्यान करें।
- स्नान और वस्त्र: ध्यान के पश्चात गणेश जी की प्रतिमा को पवित्र जल से स्नान कराएं। स्नान के बाद उन्हें नए वस्त्र और ताजे पुष्प अर्पित करें।
- पूजन सामग्री: भगवान को फूल, अक्षत (साबुत चावल), और उनकी प्रिय दूर्वा (दूब घास) श्रद्धापूर्वक चढ़ाएं।
- प्रसाद व भोग: प्रसाद के रूप में गणेश जी के समक्ष लड्डुओं का भोग लगाएं। इसके अतिरिक्त मौसमी और ताजे फलों को भी प्रसाद में शामिल करें।
- कलश स्थापना: गेंहू के ऊपर शुद्ध पानी से भरा हुआ एक कलश स्थापित करें और उस कलश के ऊपर एक नारियल रखें।
आरती के नियम
- पूजा संपन्न होने के बाद दीपक जलाकर भगवान की आरती करें।
- आरती की सभी पंक्तियों का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए।
- आरती के लिए शुद्ध रूई से बनी घी की बत्ती का ही उपयोग करें, तेल की बत्ती का उपयोग करने से बचें।
श्री गणेश जी की आरती
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।
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