श्री हनुमान चालीसा: पाठ की विधि, सम्पूर्ण चालीसा और इसके लाभ
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हनुमान चालीसा के पाठ की संपूर्ण विधि
यदि आप हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम प्रातः या सायंकाल में स्नान करके साफ लाल रंग के वस्त्र धारण करें। तदुपरांत, लाल रंग के आसन पर अपना मुख दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर करके विराजमान हों। अब पूर्ण श्रद्धाभाव से चालीसा के पाठ का आरंभ करें, परंतु उससे पूर्व प्रभु श्री राम और हनुमान जी का स्मरण करते हुए अपना संकल्प अवश्य लें।
पाठ की स्पष्ट प्रक्रिया:
- जगह का चुनाव: इसके लिए किसी शांतिपूर्ण मंदिर अथवा अपने घर के पूजा-स्थल का चयन करें।
- स्मरण: पाठ की शुरुआत करने से पूर्व अपने गुरुदेव और भगवान श्री राम का ध्यान करना अनिवार्य है।
- पूजन सामग्री एवं तैयारी: हनुमान जी के चित्र अथवा मूर्ति के सम्मुख फूल चढ़ाएं और घी या चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करके धूप दिखाएं।
- चालीसा पाठ: अपनी सुविधानुसार आप हनुमान चालीसा को 11, 7, 5 या 3 बार पढ़ सकते हैं।
- पूर्णाहूति: पाठ संपन्न होने पर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु प्रार्थना करें और अंत में हनुमान जी की आरती उतारें।
महत्वपूर्ण नियम एवं सावधानियां:
- शारीरिक और मानसिक सात्विकता (पवित्रता) का पाठ के समय विशेष रूप से पालन किया जाना चाहिए।
- मदिरापान तथा मांसाहार का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
- बैठते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपकी स्थिति मूर्ति के एकदम सामने न होकर, थोड़ी सी तिरछी हो।
- अत्यधिक विशेष फलों की प्राप्ति के लिए लगातार 40 दिनों तक नियमित रूप से इस पाठ को करने की मान्यता है।
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
हनुमान चालीसा के लाभ :
आपके जीवन में सकारात्मकता का संचार करने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में हनुमान चालीसा का नित्य पठन अत्यंत सहायक है। इसके नियमित अभ्यास द्वारा व्यक्ति को आध्यात्मिक, शारीरिक तथा मानसिक रूप से अनेक प्रतिफल प्राप्त होते हैं।
इसके प्रमुख लाभों को निम्नलिखित रूप में देखा जा सकता है:
- रोगों से मुक्ति: व्यक्ति को शारीरिक कष्टों के साथ-साथ गंभीर बीमारियों से भी राहत प्राप्त होती है।
- ज्ञान और बुद्धि: विद्यार्थियों को कुशाग्र (तीव्र) बुद्धि तथा एकाग्रचित्त होने का आशीर्वाद मिलता है।
- ग्रह दोष निवारण: शनि देव की ढैया एवं साढ़ेसाती के बुरे प्रभावों में कमी आती है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: व्यक्ति के आत्मबल और आत्मविश्वास में भारी वृद्धि होती है।
- मानसिक शांति की प्राप्ति: डिप्रेशन, चिंता तथा मानसिक तनाव से पूर्णतः छुटकारा मिलता है।
- संकटों का नाश: मनुष्य के जीवन में आने वाले बड़े से बड़े विघ्न और संकट टल जाते हैं।
- भय से मुक्ति: किसी भी प्रकार के डर, भूत-प्रेत की बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से निरंतर सुरक्षा प्राप्त होती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
हनुमान चालीसा का पाठ प्रातः या सायंकाल में करना शुभ माना जाता है। पाठ करते समय आपका मुख दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए और मूर्ति के एकदम सामने न बैठकर थोड़ा तिरछा बैठना चाहिए।
पाठ के दौरान शारीरिक और मानसिक पवित्रता (सात्विकता) बनाए रखना अनिवार्य है। इसके अलावा, मदिरापान और मांसाहार का सेवन पूरी तरह से वर्जित है।
इसके नियमित पाठ से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, भय और संकटों से मुक्ति मिलती है, रोगों का नाश होता है, और विद्यार्थियों को कुशाग्र बुद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही यह शनि देव के बुरे प्रभावों को कम करने में भी सहायक है।

